तू भ्रमर है

तू भ्रमर है, गुनगुनाता हर सुमन पर ।
सुमन भी खुश होके मुस्काता नयन भर ।।

पंखुड़ी जब देखती तेरी उड़ाने,
फड़फड़ाकर लगती वो भी पर फुलाने,
शनै-शनै: खिल वो जाती फूल बनकर ।।

हर खिले पुष्पों को तू है चूमता,
पा सुगन्धित आवरण तू झूमता,
बैठता आगोश में फूलों के छुप कर ।।

ऐ भ्रमर तू भाग्यशाली नाज़ कर ले,
इस चमन की हर कली पर राज कर ले,
डूब जा खुशबू में तू मदहोश होकर।।

हर कली एक फूल बनकर ही झड़ेगी,
उम्र की सीमा को जब वो तय करेंगी,
सिकुड़ कर लटकेगी अपनी डाल पर ।।

तू भ्रमर है, कोई उपवन ढूँढ लेगा,
आज इसका कल किसी दूजे का होगा,
फूल मुरझाएँगे देखेंगे तरसकर ।।

है यही जीवन, यही है सार जीवन,
हैं जभी तक देख ले भर के नयन,
कौन जाने कब हो जीना यूँ बिछुड़कर ।।

**जिज्ञासा सिंह**

24 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर !
    आज कल भ्रमर-भँवरे का ही ज़माना है. बेचारा पतंगा-परवाना तो बस जलने-मरने और कुर्बान होने के लिए बना है.

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    1. आपकी त्वरित और मनोबल बढ़ाती प्रेरणादायक प्रतिक्रिया मेरे लेखन की प्रेरणा है,आपको मेरा नमन और वंदन 👏💐

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  2. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार(२५-१२ -२०२१) को
    'रिश्तों के बन्धन'(चर्चा अंक -४२८९)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  3. बहुत बहुत आभार अनीता जी, चर्चा मंच में रचना को स्थान करने के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद । सादर शुभाकामनाएं ।

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  4. पंखुरी, पुष्प, भ्रमर कलि हे माध्यम से जीवन के सार को समझाने का सार्थक प्रयास ...
    बहुत सुन्दर वैरागी सी रचना ...

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    1. बहुत बहुत आभार आदरणीय दिगंबर जी, प्रशंसा के लिए आपका हार्दिक नमन और वंदन ।

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  5. बहुत ही सुंदर संदेश देती अत्यंत खूबसूरत रचना... !

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    1. बहुत-बहुत आभार प्रिय मनीषा। मेरा स्नेह आशीष आपको ।

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  6. तू भ्रमर है, कोई उपवन ढूँढ लेगा,
    आज इसका कल किसी दूजे का होगा,
    फूल मुरझाएँगे देखेंगे तरसकर ।।
    वाह!!!
    जीवन का सार पुष्प और भ्रमर में...
    बहुत ही लाजवाब सृजन।

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    1. बहुत-बहुत आभार सुधा जी। आपकी प्रशंसनीय टिप्पणी हमेशा नव रचना का माध्यम बनती है ,आप को मेरा नमन और वंदन ।

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  7. प्रतीकात्मक शैली में गहन बात कहती सार्थक रचना।
    बहुत सुंदर सृजन जिज्ञासा जी।

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  8. आपकी प्रशंसा मेरे नवसृजन आधार है कुसुम जी, आपकी प्रशंसनीय प्रतिक्रिया को मेरा नमन वंदन ।

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  9. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 28 दिसम्बर 2021 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  10. बहुत बहुत आभार आदरणीय दीदी । "पांव लिंकों का आनंद" में मेरी रचना का चयन होना मेरे लिए हर्ष का विषय है, आप को मेरा नमन और बंदन । मेरी हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  11. तू भ्रमर है, कोई उपवन ढूँढ लेगा,
    आज इसका कल किसी दूजे का होगा,
    फूल मुरझाएँगे देखेंगे तरसकर ।।

    कसकता हुआ एहसास

    बेहतरीन रचना

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  12. भ्रमर और कली के शाश्वत संबंध को दर्शाती सुंदर रचना !

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  13. बहुत-बहुत आभार आदरणीय अनीता दीदी । आप को मेरा नमन वंदन ।

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  14. लाजवाब सृजन,
    तू भ्रमर है, कोई उपवन ढूँढ लेगा,
    आज इसका कल किसी दूजे का होगा,
    फूल मुरझाएँगे देखेंगे तरसकर,
    हैं जभी तक देख ले भर के नयन,
    कौन जाने कब हो जीना यूँ बिछुड़कर,👌👌👌
    आपकी बेहतरीन रचना पढ़कर अपनी लिखी कुछ पंक्तियाँ याद आ रही हैं,आपकी रचना के सम्मान मे...

    "थोड़ा फर्क है मिजाज में फूलों और कांटों के,
    तासीर क्या नर्म हुई बेदर्द जमाना जीने नहीं देता,
    तोड़ लिए जाते हैं फूल शाखों से,
    जुदाई के आंसू भी कोई कांटों को पीने नहीं देता,"🙏

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  15. बहुत बढ़िया अंकित भाई, बहुत अच्छा सटीक और मार्मिक लिखा है।
    मेरी रचना की तारीफ के लिए आपका बहुत शुक्रिया 💐💐

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  16. प्रकृति की बात अलग है यूँ ऐसे भ्रमर से कलियों को बचना चाहिए ।
    बेहतरीन रचना ।

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