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लाडली दुल्हन बनी है

लाडली दुल्हन बनी है।


माँग में झूमर लटकता,

माथ पे बेंदा दमकता।

नाक नथिया हँस रही है,

कान पे कुंडल बहकता।

कह रहा है फुसफुसाके,

हाय दिल पे आ ठनी है॥

लाडली दुल्हन बनी है॥


झूम के वो जब चलेगी,

मुग्ध ये सृष्टि तकेगी।

तारिकाएँ चाँदनी संग,

नाचती पीछे रहेंगी।

मेह ने बूँदों से अपने,

सरगमी धुन नव बुनी है॥

लाडली दुल्हन बनी है॥


क्या अनोखा दृश्य ये है,

मन मेरा बस में नहीं है।

जो अभी कोपल उगी थी,

अब कली बन सज रही है।

दो कुलों के द्वार नव,

कुसुमों की खिलती नव लड़ी है॥

लाडली दुल्हन बनी है॥


जिज्ञासा सिंह