गली मोहल्ले के कुत्ते रोटी डालते ही
गेट पर दौड़े चले आते हैं
रात भर भौंकते हैं साथ में
पिल्ले भी कूँ कूँऽऽ चिल्लाते हैं
पीढ़ी दर पीढ़ी विराजमान हैं यहाँ
अक्सर गाड़ी से दबकर चोटिल हो जाते हैं
कई बार तो बिना इलाज
पड़े पड़े मर भी जाते है
पर जो बचते हैं वो अहसानों के तले
दबे नज़र आते हैं
वो एक रोटी का मोल
जीवन पर्यंत चुकाते चले जाते हैं
और हम इंसान किसकी कितनी रोटी खाई
ये बहुत जल्दी भूल जाते हैं
तुमने हमारे लिए क्या किया ?
कहते हुए बिलकुल नहीं शर्माते है
**जिज्ञासा**
