ग्राम पंचायत चुनाव में नाचे मन का मोर है लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
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पंचायत चुनाव में नाचे मन का मोर है


हर तरफ शोर है
मचा हुआ रोर है
कोई दुखी, कोई खुशी,
कानाफूसी जोर है

कभी इधर, कभी उधर 
डोल रही नांव भंवर
नौकाएं रंगी हुईं
चप्पू हिलकोर है

कहीं महिला, कहीं पुरुष
तौल रहे सब पौरुष
आरक्षित सीट पर
मनौवल पुरजोर है 

शंकर को गदा मिली
रामा को दो इमली
ओसाता किसान चिन्ह,
आज सिरमौर है

पुराने प्रधान की
आन बान शान की
लगी हुई वाट आज,
पीड़ा घनघोर है

पांच साल हो गया
कुछ भी न हमें मिला
घर में ही फूट मची, 
चर्चा चहुंओर है

रग्घू को घर मिला
सरजू का बल्ब जला
मुनिया को शौचालय
झगड़े का दौर है

लोग बहुत रूठे हैं
कहें, सभी झूठे है
खड़े प्रत्याशी जितने
सभी कामचोर हैं

जिसको जिताते हम
बहुत धोखा खाते हम
काम नहीं ढेला भर,
वादा कड़ोर है

अपने सब हजम करें
खाए पिए,मौज करें
खुद के लिए जीते ये
हमें कहां ठौर है 

यही तो विधान है
यही संविधान है
बड़ी बड़ी बातों का
ओर है न छोर है

काम किए या न किए
जीत की उम्मीद लिए
पंचायत चुनाव में
नाचे मन का मोर है 

**जिज्ञासा सिंह**