
याद करें वो घड़ियाँ,
जब खेलते थे हम ताई की बनाई गुड़ियाँ,
मन की ढेरों यादों से,
अपनी कुछ नन्ही सी यादें चुरा लें ।
चलो...
याद करें वो स्कूल के दिन,
खो खो खेलते,कंचे रखते गिन गिन,
झिलमिलाते कंचों सी,
अपनी यादें रंगीं बना लें ।
चलो...
याद तो होगा ही झूलों पे लम्बी पेंगें लगाना,
हरे लाल गुलाबी दुपट्टों का लहराना,
पत्तियों की न सही कीप से ही,
मनमोहक मेहंदी रचा लें ।
चलो...
याद है मुझे मेरी हर ख़ुशी में तुम्हारा ख़ुश होना,
मेरे छोटे से ग़म में मुझसे पहले रोना,
यादों के मोतियों को पिरो,
माला बना सीने से लगा लें ।
चलो...
दोस्त तो दोस्त होते हैं हमेशा,
कोई रिश्ता नहीं होता उनसा,
साल भर न सही बस एक दो पल ही,
एक दूसरे को आँखों में बसा लें ।
चलो...
**जिज्ञासा सिंह**