ठेलिया वाला गुल्ले
लाया गट्टा लइया भूजा ।
झपट पड़े कलुआ चुनमुनिया
पम्पी सिम्पी सुरजा ॥
पम्पी गट्टा लिए भागता
सिम्पी लेकर लैया ।
पीछे पीछे दौड़ा कलुआ
थोड़ा दे दो भैया ॥
मेरे जैसा प्यारा भाई
नहीं मिलेगा दूजा ॥
कौन सुने खाने की धुन में
चूहे पेट में कूदें ।
पहले अपनी भूख मिटे
तब भला किसी को दें ॥
सरफ़र सरफ़र बिना रुके
है करनी पेटपूजा ॥
मची हुई है धमाचौकड़ी
भरना सबको पेट ।
छुड़ा रहा बच्चों को गुल्ले
लेकर चिकना बेंट ॥
बिखरा भूजा मार पड़ी
है सबका गाल सूजा ॥
अम्मा उलझीं देख तमाशा
रोते भूखे बच्चे ।
झपट पड़ीं गुल्ले से बोली
इससे भूखे अच्छे ॥
आग लगे तुझमें, भूजे में
बरै मुआँ भड़भूजा ॥
**जिज्ञासा सिंह**
