तोहफ़ा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
तोहफ़ा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

तोहफा मेरा


एक अदद सा तोहफा मुझे भी देते काश 
मैं भी भर लेती अपना आकाश 

वो जो मेरा था तुम किसे दे आए 
मैंने रक्खा था बिल्कुल करीब, दिल के पास 

आज ढूंढा है कई कई बार मैंने 
वो कूची वो फ्रेम वो कैनवास 

जिसपे रंगे थे मेरी आँखों के काजल 
और जुल्फों के मुस्कराते अल्फाज़ 

हँसी भी उकेरी थी तुमने एक दिन 
वो गुलाबी गालों के रेशमी अह्सास 

जाने क्यूँ ? और किसे दे आए 
ऐसा कौन था ? तुम्हारा, मुझसे खास 

हाथ पर हाथ धरे बैठी रही मैं 
ज़रा भी नहीं हुआ मुझको आभास 

खूबसूरत अहसासों का सरमाया मेरा  
तोहफा बिखर गया बन के ताश 

**जिज्ञासा सिंह**