कुछ महिलाएं
बहनें और माताएं
देतीं जीवन भर सेवाएं
सुघड़ गृहणी कहलाएं
कुछ पढ़ी लिखी नारी
करतीं दिन भर नौकरी
साथ में घर की चाकरी
कंधे से कंधा मिला कर रहीं बराबरी
गांव की कुछ मेहरारू
कमर पे लादे मुन्ना,मुन्नी,गौरी,झबरू
संभालती खेत खलिहान,घर द्वार,इज्जत आबरू
कहलातीं धीर गंभीर गरू
एक और जात है स्त्री
बड़ी कलाकार,हुनरमंद मिस्त्री
अदाकार अभिनेत्री
घर में बनी ठनी सावित्री
दिखती है यहाँ वहाँ वो औरत
नानी, दादी, माँ जैसी सूरत
कैसी भी हो लगती बड़ी खूबसूरत
भावों भरी ममता की मूरत
अरे हां तुम भी तो हो वनिता
विदुषी, प्राज्ञी, पुनीता
देवी,दुर्गा,गौरा,सीता
धारण करती रामायण और गीता
सुंदर गंभीर रमणी
त्याग,दया,क्षमा,करुणा की जननी
नहीं चाहिए हीरे मोती और मणी
अपने में खुश जीवन मुल्यो की धनी
महान देश की महान सबलाएं
कही गईं अबलाएं
पर घर से रण तक अपनी प्रतिभा दिखलाएं
उनके आगे नतमस्तक हो, हम शीश नवाएं
सभी को महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
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**जिज्ञासा सिंह**