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आशा का पथ

 

नवल रश्मियाँ पंख लगाकर

उड़तीं जब अम्बर 

झिलमिल छवी देख इतराता 

मुस्काता सागर 


कुंजों में कोयल गाती

मधुरिम तान प्रभाती  

इंद्रधनुष के रंगों में रंग

वसुधा मन मुस्काती 

मद्धिम गति से आज 

पधारे द्वार मेरे दिनकर 


झीनी-झीनी चूनर ओढ़े

चलतीं सरस हवाएँ 

चूनर के कँगूरों पर 

लड़ियाँ हैं शोभा पाएँ 

राही मतवाला हो चलता 

आशा के पथ पर 


यहीं कहीं जीवन है रहता

इस सृष्टि के मध्य 

नाखूनों पर नर्तन करता 

एकाचित आबद्ध 

छोड़-छाड मन की वितृष्णा

राग-रागिनी भर 


नवल रश्मियाँ पंख लगाकर

उड़तीं जब अम्बर 

झिलमिल छवी देख इतराता 

मुस्काता सागर 


**जिज्ञासा सिंह**