किराए में बहुत कुछ मिलता है
घर मकान,ऊँची बड़ी दुकान,
गहना और खाने का सामान
यूँ कहें आजकल ,किराए पे कोख में बच्चा पलता है
दूल्हा दुल्हन, शादी का जोड़ा, शेरवानी
शादी में मम्मी पापा, नाना नानी
यूँ कहें किराए पे सात फेरों पे, घी का दिया जलता है
किराए पे भीड़, बुला लेते हैं नेतागण
बिजली पानी राशन, साथ देते है लंबे भाषण
ये किराए का जातिवाद और भ्रष्टाचार बहुत खलता है
चाँद पर मैंने भी ली है जमीन किराए पे
सैटलाइट में बैठ के जाएंगे किराए पे
सुना है खाना कपड़ा पानी, वहाँ किराए पे सब पहुंचता है
सब किराए पे मिले, तो काम क्या करना
अपना चैनो हराम क्या करना ?
किराया देती रहेगी अगली पीढ़ी,
अपना क्या खाक कुछ बिगड़ता है
किराए में बहुत कुछ मिलता है
**जिज्ञासा सिंह**
