कोई घोरे रंग हरेरा,कोई लिए गुलाल
भंगिया वाली पी ठंढाई, हो गईं आंखें लाल
जोगीरा सरारारा...........
बालकनी में खड़े पड़ोसी देखि देखि मुस्काय
छत से मारी भर पिचकारी सराबोर होय जायं
जोगीरा सरारारा.......
मेरी पड़ोसन फुलवा तोरैं,माली से बतियायँ
देख पड़ोसी, नैनमटक्का, ज़ोर ज़ोर चिल्लायं
जोगीरा सरारारा.........
साजन जी की मित्रमंडली, लेले गुझिया खाय
देखि के सासू आँख तरेरें, बहुत ज़ोर खिसियायं
जोगीरा सरारारा..........
साजन सज के खड़े हो गए, जैसे अफलातून
पान का बीरा उन्हें खिलाया भर भर डारा चून
जोगीरा सरारारा.........
**जिज्ञासा सिंह**
