अल्ज़ाइमर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
अल्ज़ाइमर लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

अल्ज़ाइमर से पीड़ित (मेरे अपने)

 

                                                                                                   चित्र -साभार गूगल  

                       
            क्या कहें ? मुझे पहचानते नहीं हैं वो  
                                                                
कभी परछाईं से भी मुझे जान लेते थे वो
मेरी पलकों के आंसू भी थाम लेते थे वो
साथ है, मेरा उनका चालीस बरस का
पर ऐसा लगता है, मुझे जानते नहीं है वो

 

हर रिश्ता निभाया है, जी जान से उन्होंने
लगाते उनको भी गले थे, दगा दिया हो जिन्होंने
किसी के बेटे, किसी के भाई, किसी के पिता हैं वो,
मेरे तो पती हैं, पर मानते नहीं है वो

 

वो अनुशासित रहे कदम दर कदम
गुस्सा नाक पर रहता था हरदम
बरस पड़ते थे, आंखें लाल कर किसी पर भी
अब तो भौहें भी तानते नहीं हैं वो


हर फन में माहिर, हर क्षेत्र में गुनी थे वो
सिद्धांतों के पक्के, मूल्यों के धनी थे वो
आसमान से तोड़ लाते थे तारे भी एक पल में जो 
घर से निकलने को भी ठानते नहीं है वो

 

क्या कहे ? मुझे पहचानते नहीं वो

                                                                                             **जिज्ञासा सिंह**