ये इतने तोते कहाँ से आए आसमान में
दिखता सारा गगन आज है हरा हरा
छोटे छोटे होंठ रसीले छोटे छोटे टोंट
देख देख के हुआ मगन मैं होकर लोटपोट
कुतर कुतर ये आम गिराए मेरे ही बाग़ान में
उनकी कुतरन से गुलशन है भरा भरा
ये इतनी गौरैया कहाँ से आईं हैं, मेरे दालान में
चिड़ियाघर है दिखता आँगन आज मेरा
नन्हें नन्हें पंखों वाली प्यारी सी ये चिड़िया
दाना चुगती ऐसे, जैसे खिले फूल की कलियाँ
चूँ चूँ चाँ चाँ फुर फुर उड़ती पूरे घर मकान में
सरगम जैसी बजती घर संगीत भरा
ये श्वेत,सलेटी चार कबूतर बैठे,रोशनदान में
करते गुटुर गुटुर गूँ गूँजे चौबारा
श्वेत कबूतर शांति दूत कहलाते
पहले तो ये चिट्ठी लेकर आते जाते
लगभग पूरी दुनिया में ये पाए जाते
द्वीपों, ठंडी जगहों से डरते हैं ज़रा
ये सात रंग के मोर कहाँ से आए हैं मैदान में
इंद्रधनुष सी दिखती सुंदर आज धरा
शीश पे शोभित मुकुट चंद्रिकन वाला
झूम झूम कर नाच दिखावे नर्तकप्रिय मतवाला
करे मयूरी अठखेली जब सारंग के सम्मान में
लगता कुंजनवन धरती पर है, पसरा
**जिज्ञासा सिंह**