तू मोक्ष है तरंगिणी
तू शिव जटा की धार भी
तू धरणी का श्रृंगार भी
तू मोतियों का हार भी
धरा के मानचित्र पे तू
कण्ठ में सजी लड़ी
तू मोक्ष....
तू जुगनुओं सी चमकती
तू हीरे जैसी दमकती
तू कुसुम जैसी महकती
प्रकृति की हरीतिमा तू
श्वांस संग घड़ी घड़ी
तू मोक्ष....
तू प्यास भी बुझा गई
तू भूख भी मिटा गई
तू पार भी लगा गई
जो तेरी नाव में चढ़ा
बनी सदा तू तारिणी
तू मोक्ष....
तू आरती तू वंदना
तू प्रार्थना तू अर्चना
तू मंत्र भी तू कामना
पुकारा तुझको मेघ ने
तो बदरी बन बरस पड़ी
तू मोक्ष....
तू पाप पुण्य धो गई
तू पीढ़ियों को ढो गई
तू सब के दुख में रो गई
तू पूर्वजों को तारती
रही सदा तू बंदिनी
तू मोक्ष....
**जिज्ञासा सिंह**
