जिंदगी बन जाऊँगी

मात्र बस दो गज की दूरी
और जानें बच गईं,
एक गज बस एक गज
तुम दूर रहना
ज़िंदगी बन जाऊँगी ।

वक्त का वरदान तुमसे चाहिए, 
जिंदगी है वक्त मुझसे माँगती ।
एक तिनका आँख में जो चुभ रहा,
ढूँढना एकाग्र होकर चाहती ।।
क्या किया क्या कुछ मिला ये सोचना है ?
अंत में कुछ और क्या कर पाऊँगी ?
जिंदगी बन जाऊँगी ।।

आसमाँ में जो लगाते छेद हैं,
चरण अब उनका गहूँगी ।
बैठ जाऊँगी मैं मस्तक ये झुका के,
शरण गह, नव अंकुरण मैं अब करूँगी ।।
उग सकूँगी फल सकूँगी पेड़ बनकर,
पुष्प मैं डलिया में भर ले आऊँगी ।
जिदंगी बन जाऊँगी ।।

जब चलूँ तो तुम न मुझको टोकना।
दूर हैं मंजिल की राहें हैं कठिन ।
चुभ हैं सकते कंकणों के पर नुकीले,
पहुँचने के करने हैं लाखों जतन ।।
पंथ पथरीले घनेरी रात में भी,
चाँदनी बन मार्ग पर मैं छाऊँगी ।
जिंदगी बन जाऊँगी ।।

ये कोई मुख से न निकली बात है,
बात है ये युग युगों से चल रही ।
उर के तहखाने में बैठी रात दिन,
मोक्ष के विश्वास में पल पल रही ।।
अब उसे मुक्ति दिलानी है मुझे,
सुगमता का मार्ग हर दिखलाऊँगी ।।
जिंदगी बन जाऊँगी ।।

**जिज्ञासा सिंह** 
 चित्र साभार गूगल

19 टिप्‍पणियां:

  1. आशा का संचार करती बहुत सुंदर रचना, जिज्ञासा दी।

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    1. तारीफ के लिए आपका हार्दिक आभार ज्योति जी ।

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  2. वक्त का वरदान तुमसे चाहिए,
    जिंदगी है वक्त मुझसे माँगती ।
    एक तिनका आँख में जो चुभ रहा,
    ढूँढना एकाग्र होकर चाहती ।।

    पंथ पथरीले घनेरी रात में भी,
    चाँदनी बन मार्ग पर मैं छाऊँगी ।
    बहुत सुन्दर पंक्ति । आपसे शब्दों का गठजोड़ सीखना है मुझे ।

    भाव से भरी सुन्दर रचना ।


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    1. प्रशंसा युक्त प्रतिक्रिया नव सृजन का संबल बनती है स्नेह बनाए रखें ।
      आप के ब्लॉग पर गई थी ।कॉमेंट ऑप्शन नहीं खुला । ज्यादा ज्ञान नहीं, पर को आता है, उसमें जो भी आपको सीखना हो हाजिर हूं।

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  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (२१-०५-२०२२ ) को
    'मेंहदी की बाड़'(चर्चा अंक-४४३७)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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  4. रचना को चर्चा मंच में चर्चा के लिए चयन होना हर्ष का विषय है
    बहुत आभार आपका अनीता जी । सादर शुभकामनाएं ।

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  5. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" रविवार 22 मई 2022 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. सादर अभिवादन दीदी । पांच लिंको में मेरी रचना के चयन के लिए आपका बहुत बहुत आभार ।मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

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  6. ज़िंदगी से बड़ी भेंट कोई किसी को क्या दे सकता है।सुंदर रचना

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  7. जिंदगी बन जाऊंगी
    बहुत सुंदर और सार्थक सृजन

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  8. बहुत बहुत आभार आपका आदरणीय।

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  9. चलते रहना ही जीवन है !!बहुत सुंदर !!

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  10. बहुत आभार आपका अनुपमा जी ।

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  11. बेहद खूबसूरत रचना हार्दिक शुभकामनायें !

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  12. बहुत आभार आपका संजय जी ।

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