मैं जीवन में नित नए अनुभवों से रूबरू होती हूँ,जो मेरे अंतस से सीधे साक्षात्कार करते हैं,उसी साक्षात्कार को कविता के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास है मेरा ब्लॉग, जिज्ञासा की जिज्ञासा
आपका यह गीत पढ़ते ही मन में एक शांत और गहरा भाव जागता है। आपने प्रेम, प्रतीक्षा और समर्पण को बहुत सादगी से शब्द दिए हैं। शब्दों में कोमलता भी है और एक हल्की सी तड़प भी महसूस होती है। खास बात यह लगी कि आप पड़ने वाले को भी इस भाव में शामिल कर लेते हैं।
आपका यह गीत पढ़ते ही मन में एक शांत और गहरा भाव जागता है। आपने प्रेम, प्रतीक्षा और समर्पण को बहुत सादगी से शब्द दिए हैं। शब्दों में कोमलता भी है और एक हल्की सी तड़प भी महसूस होती है। खास बात यह लगी कि आप पड़ने वाले को भी इस भाव में शामिल कर लेते हैं।
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