मिट्टी की गागरी

भरी गागरी बड़ी जतन से 
मिट्टी वाली ।
ठूँस ठूँस कर भरी गई 
फिर भी है खाली ॥

स्वर्ण रत्न की घोंट पिलायी
हीरे मोती पन्ना,
माणिक मुकुट जड़ा कुंदन संग
बनी सेठ वो धन्ना,
डाल कंठ मोती की लड़ियाँ
ठसक भरी मतवाली ।
भरी गागरी बड़ी जतन से 
मिट्टी वाली ॥

ख्याति हुई चहुँ ओर दिशा में
व्यापारों का मेला,
तुला लिए अनगिन सौदागर
झोल भाव का खेला,
तुलापट्ट की तने तने
चटकी तनकर डाली  ।
भरी गागरी बड़ी जतन से 
मिट्टी वाली ॥

राबा ढाबा किसका
जाने कैसा राबा ढाबा,
फँसा भँवर में चप्पू ढूँढे
जमुना तट दोआबा,
गागर की पहचान बनी
अब मिट्टी काली ।
भरी गागरी बड़ी जतन से 
मिट्टी वाली ॥

**जिज्ञासा सिंह**

26 टिप्‍पणियां:

  1. इस मिट्टी की गगरी को ही बस सजाते संवारते राह जाते हैं । और एक दिन ये भी जल कर काली मतलब की राख हो जाती है । गहन और बेहतरीन अभव्यक्ति ।।

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    1. त्वरित और सार्थक प्रतिक्रिया के लिए आपका बहुत बहुत आभार दीदी ।आपको मेरा सादर अभिवादन।

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  2. आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल बुधवार (01-06-2022) को चर्चा मंच      "जीवन जीने की कला"  (चर्चा अंक-4448)     पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य यह है कि आप उपरोक्त लिंक पर पधार कर चर्चा मंच के अंक का अवलोकन करे और अपनी मूल्यवान प्रतिक्रिया से अवगत करायें।
    -- 
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'    
    --

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  3. आदरणीय शास्त्री जी, प्रणाम!
    रचना को चर्चा मंच में चयन करने के लिए आपका हार्दिक आभार और अभिनंदन। मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

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  4. गागरी तो मिट्टी की ही रहेगी, चाहे उसमें हीरे-जवाहरात रखो, चाहे उसमें तुच्छ से तुच्छ सामान रखो.

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  5. स्वर्ण रत्न की घोंट पिलायी
    हीरे मोती पन्ना,
    माणिक मुकुट जड़ा कुंदन संग
    बनी सेठ वो धन्ना,
    डाल कंठ मोती की लड़ियाँ
    ठसक भरी मतवाली ।
    भरी गागरी बड़ी जतन से
    मिट्टी वाली ॥
    ..वाह! बहुत खूब!

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    1. मनोबल बढ़ाती प्रतिक्रिया के लिए आपका हार्दिक आभार कविता जी ।

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  6. वाह, निर्जीव को सजीव कर देने का सुन्दर उदाहरण।बधाई

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  7. वाह अनमोल रचना,साधुवाद |

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  8. आपका बहुत बहुत आभार अनुपमा जी ।

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  9. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 1 जून 2022 को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!
    अथ स्वागतम शुभ स्वागतम।

    कल शायद पब्लिश नहीं हुआ था..🙏

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  10. वाह वाह!सुंदर अभिव्यक्ति।

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  11. गागर के बहाने जीवन के मर्म को बतातीं सुंदर पंक्तियाँ

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  12. वाह बेहद खूबसूरत रचना जिज्ञासा जी।

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  13. गहन ,गूढ़ , गंभीर भावाभिव्यक्ति जिज्ञासा जी ! अत्यंत सुन्दर सृजन ।

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