नारी जो गरभधारी


नारी जो गरभधारी, चले चाल मतवारी,
लचक मचक देख हिरनी लजात है ।
रत्नारी कजरारी, शीश धरे घट भारी
लगे पिया की दुलारी,सबै देखि सकुचात है ।।

भरी बदरी सी गढ़ी,मेघ आगे पीछे मढ़ी 
मोती जैसे बूँद बूँद, गिरे झरे बरसात है ।
कोई अँचरा पसारो,गोरी धना को संभारो 
देखो सृष्टि की जननी डगर चली जात है ।।

कोई उदर निहारे,कोई डगर निहारे 
कोई देख हथेली, पूँछे हाल कुशलात है ।
कोई कहे लाडो आए, कोई कहे लाला आए 
सुन सुन गोरी आज मन मुस्कात है ।।

सुघड़ सहेज बिन चुन खाए मेवा मिश्री 
राम किशन छवि नैन समात है ।
कन्या जो घर आए, देवी दुर्गा रूप धरे,
ममता वात्सल्य बीच लुटी आज जात है ।। 

**जिज्ञासा सिंह**
चित्र साभार गूगल 

30 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है जिज्ञासा जी! आपकी काव्य-प्रतिभा तो निरंतर अपनी सीमाओं का विस्तार कर रही है। यह गीत (जी हां, इसे गीत ही कहूंगा) अद्भुत है। कोटिकोटि अभिनंदन।

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    1. आपकी हौसला बढ़ाती प्रतिक्रिया का हार्दिक शुक्रिया । आपको मेरा सादर नमन।

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  2. सुघड़ सहेज बिन चुन खाए मेवा मिश्री
    राम किशन छवि नैन समात है ।
    कन्या जो घर आए, देवी दुर्गा रूप धरे,
    ममता वात्सल्य बीच लुटी आज जात है ।। वाह!! अद्भुत सृजन जिज्ञासा जी।

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    1. आपकी बहुमूल्य टिप्पणी को दिल से नमन करती हूं।

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  3. जी नमस्ते ,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार(२१-०७-२०२१) को
    'सावन'(चर्चा अंक- ४१३२)
    पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित है।
    सादर

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    1. अनीता जी,नमस्कार !
      मेरी रचना को चर्चा मंच में चयनित करने के लिए आपका तहेदिल से शुक्रिया,सादर शुभकामनाओं सहित जिज्ञासा सिंह ।

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  4. ओह गहनतम लेखन...। गहरे भाव...।

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  5. संदीप जी आपका बहुत बहुत आभार।

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  6. नारी जो गरभधारी, चले चाल मतवारी,
    लचक मचक देख हिरनी लजात है ।
    रत्नारी कजरारी, शीश धरे घट भारी
    लगे पिया की दुलारी,सबै देखि सकुचात

    बहुत ही गहन शब्दों के साथ बहुत ही सुंदर रचना

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    1. आपकी प्रशंसनीय प्रतिक्रिया को सादर नमन करती हूँ।आपका बहुत बहुत आभार।

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  7. बहुत बढ़िया शब्द चित्र प्रिय जिज्ञासा जी। भावी सृजन को भीतर धारण करने वाली मातृशक्ति को समर्पित ये अनूठी रचना है 👌👌👌👌 सबकी प्यारी और आँखों का तारा बनी ,अतुल्य ममत्व का विपुल सौंदर्य धारण लिए इस भावी जननी को मेवा मिस्री क्यों ना खिलाया जाए। भविष्य की संतति का पोषण जो हो रहा है ।। इस अनुपम नैसर्गिक सुंदरता को निहारने के लिए इस सुद्क्ष कवि दृष्टि को नमन है जो आंतरिक और बाह्य दोनों सौंदर्य का भली भांति अवलोकन करने में सक्षम है। हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई आपको इस शानदार रचना के लिए 🙏🌷🌷💐

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    1. आपकी सुंदर प्रशंसा को मेरा सादर नमन,आख़िर आप भी तो इस सृष्टि की जननी हैं प्रिय सखी।आपका बहुत बहुत आभार।

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  8. अद्भुत काव्यसृजन। शब्दमय, चित्रमय, सौन्दर्यमय, वात्सल्यमय।

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    1. आपकी सुंदर शब्दों से सजी प्रशंसा को मेरा सादर नमन,आपका बहुत बहुत आभार।

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  9. भरी बदरी सी गढ़ी,मेघ आगे पीछे मढ़ी
    मोती जैसे बूँद बूँद, गिरे झरे बरसात है ।
    कोई अँचरा पसारो,गोरी धना को संभारो
    देखो सृष्टि की जननी डगर चली जात है ।।
    बहुत ही सुंदर सृजन।

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    1. आपका बहुत बहुत बहुत आभार ज्योति जी,आपकी प्रशंसा को सादर नमन।

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  10. सुन्दर भावों से गूंथी रचना मुग्ध करती है - - सुघड़ सहेज बिन चुन खाए मेवा मिश्री
    राम किशन छवि नैन समात है ।
    कन्या जो घर आए, देवी दुर्गा रूप धरे,
    ममता वात्सल्य बीच लुटी आज जात है ।। साधुवाद सह।

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    1. शान्तनु जी,आपकी प्रतिक्रिया हमेशा मनोबल बढ़ाती है,आपका कोटि कोटि आभार।

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    1. आपका बहुत बहुत आभार ओंकार जी,आपको मेरा सादर नमन,

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  12. गर्भवती नारी पर ऐसा काव्य सृजन!!!!
    क्या बात!!!!
    कमाल का लेखन...सोच बदल देने वाला.. कहाँ गर्भवती बेचारी अबला से हटकर "देखो सृष्टि की जननी डगर चली जात है" ।.....अद्भुत!!!!
    राम किशन छवि नैन समात है ।
    कन्या जो घर आए, देवी दुर्गा रूप धरे,
    ममता वात्सल्य बीच लुटी आज जात है ।
    सृष्टि की जननी की ये सम्मानित रूप दिल को भा गया जिज्ञासा जी!
    ऐसे अद्भुत एवं लाजवाब सृजन हेतु बहुत बहुत बधाई आपको।

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  13. सुधा जी, कविता को विस्तार देती आपकी अनुपम प्रतिक्रिया से अभिभूत हूं,सच कोई माने न माने स्त्री तो सृष्टि की जननी है ही,और हमें गर्व भी होना चाहिए। आपकी बहुमूल्य टिप्पणी को हार्दिक नमन एवम वंदन।

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  14. वाह सुगठित काव्य, बहुत सुन्दर!

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    1. निरंतर आपके प्रोत्साहन की आभारी हूं, अपको मेरा सादर नमन।

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  15. नारी की सुंदरता से परिचय कराने के लिए आपको बधाई। नारी की महानता की तरह नारी की सुंदरता का वर्णन कभी पूरा ही नहीं होता।

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  16. वीरेन्द्र जी, मैं कई बार आपके ब्लॉग पर गई,पर कोई पोस्ट नहीं दिख रही थी,आज आपकी प्रतिक्रिया देख बहुत हर्ष हुआ,खासतौर से आपकी कुशल जानकर,प्रशंसा के लिए आभार एवम आपको मेरी हार्दिक शुभकामनाएं।

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  17. नारी की सुंदरता माँ बनने में और उसे आपने शब्द दिए । बहुत सुंदर सृजन

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  18. बहुत बहुत आभार आपका दीदी🙏💐

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  19. आपका बहुत बहुत आभार आदरणीय।

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