चाँद पर तुम भी चलो हम भी चलें,
देखते हैं कौन पहले पहुँचता है।
एक पत्थर तुम उछालो एक हम,
चाँद के उस पार किसका निकलता है॥
था अगर मामा तो चंदा था हमारा,
विश्व की टूटी हैं अब खामोशियाँ।
पहुँचने को थे सभी तैयार बैठे,
हम पहुँच कर बन गए हैं सुर्ख़ियाँ॥
आत्मसंयम साधना बुद्धि व शक्ति,
पहुँचने का का मंत्र धीरज सजगता है।
चाँद पर इतिहास रच वैज्ञानिकों ने,
कर लिया अधिकार अपना सर्वसम्मत।
बढ़ गई है ज्योति दृग सबके खुले,
देख हिंदुस्तान का चैतन्य अभिमत॥
यान तो जाते रहे जाते रहेंगे,
आज सिक्का पर हमारा चमकता है॥
ये कोई सामान्य सा न कारनामा,
है सहजता से मिली न विजयश्री ये।
हम नमन करते हैं उन विज्ञानियों को,
जिनके अनथक परिश्रम से है मिली ये॥
राष्ट्र को ऊपर रखा परिवार से,
त्याग-तप से मिली अनुपम सफलता है॥
जिज्ञासा सिंह







