चित्र -साभार गूगल
क्या कहें ? मुझे पहचानते नहीं हैं वोकभी परछाईं से भी मुझे जान लेते थे वोमेरी पलकों के आंसू भी थाम लेते थे वोसाथ है, मेरा उनका चालीस बरस कापर ऐसा लगता है, मुझे जानते नहीं है वो
हर रिश्ता निभाया है, जी जान से उन्होंनेलगाते उनको भी गले थे, दगा दिया हो जिन्होंनेकिसी के बेटे, किसी के भाई, किसी के पिता हैं वो,मेरे तो पती हैं, पर मानते नहीं है वो
वो अनुशासित रहे कदम दर कदमगुस्सा नाक पर रहता था हरदमबरस पड़ते थे, आंखें लाल कर किसी पर भीअब तो भौहें भी तानते नहीं हैं वो
हर फन में माहिर, हर क्षेत्र में गुनी थे वोसिद्धांतों के पक्के, मूल्यों के धनी थे वोआसमान से तोड़ लाते थे तारे भी एक पल में जोघर से निकलने को भी ठानते नहीं है वो
क्या कहे ? मुझे पहचानते नहीं वो
**जिज्ञासा सिंह**







